बस्तर के नवाचार देख उत्साहित हुईं बिलासपुर की दीदियाँ, एक्सपोजर विजिट में सीखीं इंटीग्रेटेड फार्मिंग की बारीकियां….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आजीविका के नए आयाम गढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक से आए 50 सदस्यीय दल ने बस्तर जिले का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित इस एक्सपोजर विजिट का मुख्य उद्देश्य बस्तर के जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉकों में संचालित सफल कृषि और पशुपालन मॉडल्स का गहन अध्ययन करना था। इस भ्रमण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत जनपद पंचायत के सभागार में आयोजित एक विस्तृत तकनीकी सत्र से हुई, जहाँ पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के क्रियान्वयन, किसानों के चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान बिलासपुर से आए प्रतिभागियों, समूह सदस्यों और कार्यालय स्टाफ को उप-समिति के कार्यों के साथ-साथ आजीविका सेवा केंद्रों द्वारा महिला किसानों को दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की जानकारी दी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे एक व्यवस्थित कार्ययोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है। सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करने के पश्चात दल ने क्षेत्र का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर संचालित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। सदस्यों ने विशेष रूप से ब्रुडिंग सेंटर और उन्नत मुर्गी पालन की बारीकियों को समझा, जिसमें मुर्गियों के आहार प्रबंधन से लेकर टीकाकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बस्तर के नवाचार देख उत्साहित हुईं बिलासपुर की दीदियाँ

इसके साथ ही दल ने क्लस्टर के भीतर मछली पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका के पूरक माध्यमों का भी अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान बस्तर की दीदियों द्वारा अपनाई गई उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण के तरीकों ने बिलासपुर के दल को खासा प्रभावित किया। केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद होने वाली ग्रेडिंग, पैकेजिंग और स्थानीय मंडियों के माध्यम से सीधे बाजार से जुड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीति भी साझा की गई।

बस्तर की दीदियों के द्वारा बुक्स ऑफ रिकॉर्ड के सटीक संधारण और उनके आत्मविश्वास ने आगंतुक दल के भीतर एक नया उत्साह भर दिया। 24 से 25 फरवरी तक आयोजित यह दो दिवसीय दौरा न केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि दो अलग-अलग जिलों के महिला समूहों के बीच तकनीकी कौशल और अनुभवों को साझा करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस पूरी यात्रा ने प्रतिभागियों को यह विश्वास दिलाया कि समेकित खेती और आधुनिक मार्केटिंग के तालमेल से ग्रामीण जीवन में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोले जा सकते हैं।

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