पारंपरिक उपचार पद्धति के संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना मिसाल, 11 वैद्य सम्मेलनों से 1600 से अधिक वैद्यों को मिला प्रशिक्षण, हीलर हर्बल गार्डन और आधुनिक उपकरणों से बढ़ी क्षमता….

 रायपुर: वैद्य सम्मेलनों का आयोजन पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। इन आयोजनों से अनुभवी वैद्यों के पास मौजूद स्थानीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण होता है और छात्रों व युवा चिकित्सकों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने का अनूठा अवसर मिलता है l छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा राज्य की पारंपरिक उपचार पद्धतियों को संरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बोर्ड ने प्रदेशभर में 11 वैद्य सम्मेलनों का आयोजन कर पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल की है।

1600 से अधिक वैद्यों ने किया ज्ञान और अनुभव साझा

बोर्ड द्वारा आयोजित सम्मेलनों में एक राज्य स्तरीय, छह संभाग स्तरीय और चार जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन शामिल रहे। 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित राज्य स्तरीय वैद्य सम्मेलन में लगभग 1100 वैद्यों ने भाग लिया, जबकि अन्य सम्मेलनों में करीब 1600 वैद्य शामिल हुए। इन आयोजनों में वैद्यों को औषधीय पौधों के वैज्ञानिक एवं वानस्पतिक नामों की जानकारी दी गई, जिससे उनके पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा जा सके। साथ ही वैद्यों ने अपने अनुभवों और उपचार पद्धतियों का आदान-प्रदान भी किया।

सिखाई गई विनाश-विहीन विदोहन तकनीक

सम्मेलनों में वैद्यों को औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिए विनाश- विहीन विदोहन तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इससे पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना उनका संग्रहण संभव हो सकेगा और भविष्य में भी इनका उपयोग जारी रहेगा।

पारंपरिक उपचार पद्धति के संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना मिसाल

हीलर हर्बल गार्डन योजना से बढ़ रहा आत्मनिर्भरता का दायरा

बोर्ड द्वारा पिछले दो वर्षों से नवाचार योजना के तहत हीलर हर्बल गार्डन योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से वैद्यों को उनकी बाड़ी में छोटे औषधीय उद्यान विकसित करने के लिए तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इससे आवश्यक वनौषधियां उनके घर के आसपास ही उपलब्ध हो रही हैं।

स्कूल हर्बल गार्डन से बच्चों को मिल रही पारंपरिक ज्ञान की सीख

बोर्ड द्वारा वैद्यों को उनके गांव के स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल विद्यार्थियों को औषधीय पौधों और स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

पल्वराइजर मशीन से आसान हुआ जड़ी-बूटियों का प्रसंस्करण

वैद्यों को उच्च गुणवत्ता वाली औषधियां तैयार करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए बोर्ड ने पिछले दो वर्षों में निःशुल्क पल्वराइजर मशीनें उपलब्ध कराई हैं। राज्य के 28 जिलों में कुल 40 मशीनें वैद्य समूहों को वितरित की गई हैं।

प्रत्येक मशीन का उपयोग 8 से 10 वैद्य सामूहिक रूप से कर रहे हैं। इससे जड़ी-बूटियों का बेहतर प्रसंस्करण संभव हो रहा है और उच्च गुणवत्ता वाली औषधियों के निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।

पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की ये पहलें न केवल पारंपरिक उपचार पद्धतियों को संरक्षित कर रही हैं, बल्कि वैद्यों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे राज्य की समृद्ध स्वास्थ्य परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

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