ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बनीं शशि देवी कंवर – महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी….

रायपुर: धमतरी जिले के ग्राम रीवागहन निवासी श्रीमती शशि देवी कंवर का जीवन संघर्ष से शुरू होकर आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायी मिसाल बन गया है। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन करने वाली शशि देवी आज अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के सहयोग से सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर रही हैं।

विवाह के बाद उनकी पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। घर की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वे अपने पति श्री ज्योति कुमार कंवर के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। सीमित आय के कारण परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती था। ऐसे कठिन समय में उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बेहतर भविष्य की तलाश जारी रखी।

वह ग्राम रीवागहन में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत आईसीआरपी टीम के आगमन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। टीम की दीदियों ने ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़कर सामूहिक बचत, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के बारे में जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर शशि देवी ने नव दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़कर अध्यक्ष के रूप में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।
उन्होंने नियमित रूप से साप्ताहिक बैठकों में भाग लिया, समूह में बचत को बढ़ावा दिया और मिशन के 11 सूत्रों का पालन करते हुए समूह संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी मिलनसार, नेतृत्व क्षमता और जागरूक कार्यशैली को देखते हुए उन्हें समूह की सक्रिय महिला के रूप में भी चयनित किया गया।

परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए शशि देवी ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी दौरान उन्हें जिला पंचायत धमतरी के सहयोग से बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (बड़ौदा आरसेटी) में संचालित ई-रिक्शा प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उन्होंने उत्साहपूर्वक 30 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया और प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से ऋण प्राप्त कर ई-रिक्शा खरीदा।

धमतरी : ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बनीं शशि देवी कंवर - महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी

आज श्रीमती शशि देवी ई-रिक्शा संचालन के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 800 से 1000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर उन्होंने एक और ई-रिक्शा खरीदा, जिसे उनके पति संचालित करते हैं। इससे परिवार की आय में और अधिक वृद्धि हुई है और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।

सरकार की योजनाओं का लाभ लेते हुए वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का घर भी प्राप्त हुआ। अब उनका परिवार सुरक्षित और बेहतर वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है। आज शशि देवी आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनके दो बच्चे हैं—बेटी बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा स्नातक में अध्ययनरत है। शशि देवी का सपना है कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर और समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाएं।

शशि देवी अब अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे बताती हैं कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

श्रीमती शशि देवी कंवर की यह प्रेरक यात्रा दर्शाती है कि शासन की योजनाओं और स्वयं के दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से निकलकर आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उनकी सफलता आज ग्रामीण महिलाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

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