आत्मविश्वास, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं अल्पना सिंह…..

रायपुर: मनेन्द्रगढ़़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत बहरासी की निवासी श्रीमती अल्पना सिंह आज ग्रामीण अंचल में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति, परिश्रम और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग ने उनके सपनों को साकार कर दिया। अल्पना सिंह की यह कहानी न केवल एक महिला की सफलता की दास्तान है, बल्कि यह उन हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने का साहस रखती हैं।

ग्राम बहरासी में सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही अल्पना सिंह के लिए परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। सीमित आय के कारण बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और भविष्य की योजनाएं अधूरी सी लगती थीं। इसी दौरान वे छमता महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ना उनके जीवन का एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जहां उन्हें बचत, ऋण, सामूहिक सहयोग और आत्मविश्वास का महत्व समझ में आया।

वर्ष फरवरी 2017 में अल्पना सिंह ने सीआईएफ एवं बैंक लिंकेज ऋण के माध्यम से कुल 60,000 रुपये की ऋण राशि प्राप्त की। इस पूंजी को उन्होंने किसी अनावश्यक खर्च में न लगाकर, एक स्थायी आजीविका के रूप में किराना जनरल स्टोर प्रारंभ करने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनके जीवन को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। छोटे स्तर से शुरू की गई इस दुकान में उन्होंने रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध कराना शुरू किया, जिससे गांव के लोगों को सुविधा मिली और उनका व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ने लगा। दुकान के संचालन में अल्पना सिंह ने पूरी ईमानदारी, अनुशासन और ग्राहकों के प्रति विश्वास को प्राथमिकता दी। समय पर दुकान खोलना, उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण सामान देना और ग्राहकों से मधुर व्यवहार करना उनकी पहचान बन गया। इसी का परिणाम है कि आज उनका जनरल स्टोर गांव में भरोसे का केंद्र बन चुका है। वर्तमान में उन्हें इस व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 5,000 से 8,000 रुपये तक की नियमित आय प्राप्त हो रही है।

इस आय से अल्पना सिंह ने न केवल समय पर ऋण की किश्तें चुकाईं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया। बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें और सामाजिक दायित्व को अब वो आत्मनिर्भर होकर निभा रही हैं। आज उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि वे स्वयं दूसरों को सहयोग करने की स्थिति में हैं। अल्पना सिंह की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने स्वयं में आए बदलाव को समाज तक पहुंचाया। वे अब अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़ने, बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।

आज अल्पना सिंह केवल एक किराना दुकान संचालिका नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण महिला उद्यमिता की सशक्त पहचान हैं। उनका संघर्ष, समर्पण और सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर, मार्गदर्शन और विश्वास मिले, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।

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