इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: राज्यपाल रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक….

रायपुर: राज्यपाल श्री रमेन डेका आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के 17 वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने विभिन्न संकायों के सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कला का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज के कल्याण के लिए करने का आह्वान किया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, धरसींवा विधायक डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे। समारोह में 5 शोधार्थियों को डी.लिट् की उपाधि प्रदान की गई। 64 शोधार्थियों को शोध उपाधि प्रदान की गई। 236 विद्यार्थियों को पदक वितरण किया गया जिसमें 232 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं 4 विद्यार्थियों को रजत पदक दिया गया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज्यपाल ने कहा कि खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जायेगा। इसके लिये उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने कहा। श्री डेका ने कहा कि भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य धरोहर ललित कलाओं के विकास में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का अविस्मरणीय योगदान है। लघु भारत का स्वरूप इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी के दान का प्रतिफल है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक

अपनी राजकुमारी इन्दिरा की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए अपने महल को दान देकर उन पुण्यात्माओं ने छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया। कला राष्ट्र के जीवन का एक मुख्य अंग है। संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और साहित्य का सम्बन्ध प्रत्यक्ष रूप से जीवन और समाज से रहा है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य यंत्रवत और संवेदनहीनता की ओर बढ़ रहा है, इसे हमें रोकना है। ललित कलाओं के माध्यम से हम मानव जीवन में सरसता ला सकते हैं। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के सत्रहवें दीक्षान्त समारोह में पदक प्राप्तकर्ताओं एवं उपाधि धारकों को उनके स्वर्णिम भविष्य की कामना करते हुये उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक

कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि किसी भी देश अथवा समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण-पत्र बांटने की रस्म नहीं है, यह अपनी उपलब्धियों के सिंहावलोकन और भविष्य के संकल्प का दिन है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का परचम न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है।

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कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली नामपट्टिका का अनावरण किया। विश्वविद्यालय प्रांगण में स्थित यह बावली प्राचीन धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जा रहा है। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचार एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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