रायपुर साहित्य उत्सव : ‘ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक’ विषय पर लाल जगदलपुरी मंडप में परिचर्चा आयोजित….

रायपुर: रायपुर साहित्य उत्सव के तीसरे और समापन दिवस पर लाल जगदलपुरी मंडप में प्रथम सत्र के रूप में “ट्रैवल ब्लॉग: पर्यटन के प्रेरक” विषय पर एक विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में प्रसिद्ध यात्रा पत्रकार, ब्लॉगर एवं एकल यात्री सुश्री कैनात काज़ी तथा “देसी चश्मे से लंदन डायरी” की लेखिका सुश्री शिखा वर्शनी ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन श्री राहुल चौधरी ने किया।

अपने वक्तव्य में सुश्री कैनात काज़ी ने कहा कि हिंदी साहित्य ने उनकी यात्रा-यात्रा को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साहित्य से प्रेरित होकर उन्होंने यात्रा आरंभ की और भारत के विभिन्न हिस्सों में किए गए अपने भ्रमण अनुभवों ने उन्हें ब्लॉग लेखन और अनुभवों के दस्तावेजीकरण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वे मूलतः सीखने और खोज की भावना से यात्रा करती हैं, जबकि ब्लॉगिंग, डायरी लेखन और लोकप्रियता इस यात्रा के स्वाभाविक उपफल मात्र हैं।

सचेत यात्रा पर बल देते हुए उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि वे यात्रा को केवल देखने तक सीमित न रखें, बल्कि उसमें पूर्ण रूप से डूबें। उन्होंने कहा कि ट्रैवल ब्लॉगिंग पर्यटन स्थलों, संस्कृतियों और घटनाओं के प्रत्यक्ष अनुभवों को संजोने का एक सशक्त माध्यम है।

अपने यात्रा-सफर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में सुश्री शिखा वर्शनी ने कहा कि जिज्ञासा ही उनकी यात्राओं और लेखन की मूल प्रेरणा रही है। उन्होंने साझा किया कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उनका परिचय हिंदी साहित्य से हुआ, जिसने उन्हें अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करने के लिए आवश्यक शब्द-सम्पदा और संवेदनशीलता प्रदान की। उन्होंने बताया कि यद्यपि वे भारत में केवल 14–15 वर्ष ही रहीं, लेकिन अपने पिता के साथ देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राओं ने उन्हें भारतीय संस्कृति के विविध रंगों से परिचित कराया।

उन्होंने कहा, “दुनिया भर की यात्रा के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि हम अपने ही देश की पर्यटन संभावनाओं को अक्सर कम आँकते हैं। भारत का ऐतिहासिक वैभव और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत हमारी परंपराओं, रीति-रिवाजों, स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों में प्रतिबिंबित होती है। भारतीय होने के नाते हमें न केवल इस धरोहर पर गर्व करना चाहिए, बल्कि इसे स्वयं अनुभव करने के लिए भी गंभीर प्रयास करने चाहिए।”

सत्र का संचालन करते हुए श्री राहुल चौधरी ने अपने यात्रा अनुभव साझा किए और यात्रा लेखन में सूक्ष्म अवलोकन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक-संस्कृति और हरित परिदृश्य के कारण प्रत्येक यात्री की ‘मस्ट-विज़िट’ सूची में अवश्य शामिल होना चाहिए।

युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए पैनलिस्टों ने कहा कि पठन-पाठन की घटती प्रवृत्ति के कारण युवाओं की शब्द-सम्पदा सीमित होती जा रही है। उन्होंने युवाओं से साहित्य के साथ गहन जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही लेखकों से भी आग्रह किया कि वे अपनी भाषा और लेखन शैली को अधिक सहज, सरल और युवा-अनुकूल बनाएं।

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