अब राज्य में होने वाली हर शादी का पंजीयन करवाना जरूरी, ‘बाल विवाह’ जैसी कुप्रथाओं पर होगा बड़ा प्रहार

KOHRAM NEWS… अगर आप छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, तो सावधान हो जाइए। राज्य सरकार ने अब नियमों को सख्त कर दिया है। छत्तीसगढ़ में अब विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य, यानी ‘मैंडेटरी’ कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार के विधि-विधायी कार्य विभाग ने राजपत्र में एक अधिसूचना जारी की है। इस सरकारी आदेश में साफ-साफ लिखा है कि अब राज्य में होने वाली हर शादी का पंजीयन करवाना जरूरी होगा। यह नियम सिर्फ आज या कल होने वाली शादियों पर नहीं, बल्कि पिछले कुछ सालों में हुई शादियों पर भी लागू होगा।

अधिसूचना के मुताबिक, 29 जनवरी 2016 के बाद जिन भी लोगों का विवाह छत्तीसगढ़ में हुआ है, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के अंदर अपने विवाह का पंजीयन करवाना अनिवार्य है। यानी अगर आपकी शादी पिछले 7-8 सालों के भीतर हुई है और आपके पास मैरिज सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपको तुरंत सतर्क होने की जरूरत है।

राज्य सरकार का कहना है कि विवाह पंजीयन अनिवार्य होने से सबसे बड़ा प्रहार ‘बाल विवाह’ जैसी कुप्रथाओं पर होगा। जब रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, तो उम्र के दस्तावेज जमा करने होंगे, जिससे कम उम्र में शादी करना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, समाज में फर्जी और दिखावटी शादियों के मामले भी कम नहीं हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया इन पर लगाम लगाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे महिलाओं के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे। अक्सर देखा जाता है कि घरेलू विवाद या तलाक की स्थिति में महिलाओं के पास अपनी शादी साबित करने का कोई ठोस दस्तावेज नहीं होता, लेकिन अब यह प्रमाण पत्र उनका सबसे बड़ा हथियार बनेगा।

अगर आप शादी के एक महीने के भीतर ही पंजीयन करवा लेते हैं, तो आपको सरकारी शुल्क के तौर पर मात्र 20 रुपये चुकाने होंगे। लेकिन, अगर आप लापरवाही बरतते हैं और एक महीने का समय बीत जाता है, तो आपको विलंब शुल्क यानी लेट फीस देनी होगी और यह राशि बढ़कर 520 रुपये हो जाएगी। इसके अलावा, लेट होने पर आपको मैरिज रजिस्ट्रार से विशेष अनुमति भी लेनी पड़ सकती है। इसलिए समझदारी इसी में है कि शादी की शहनाई गूंजते ही रजिस्ट्रेशन की तैयारी भी शुरू कर दें।

आवेदन कैसे करें और कहाँ जाएं?

आप जिस भी स्थानीय निकाय की सीमा में रहते हैं, चाहे वह नगर निगम हो, नगर पालिका हो या जनपद पंचायत, वहां के ऑफिस में जाकर आप आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने सुविधा के लिए चॉइस सेंटर्स को भी अधिकृत किया है और ऑनलाइन पोर्टल का विकल्प भी खुला रखा है। आवेदन करने के महज एक हफ्ते के अंदर ही शादी का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा, ताकि परिजनों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

आवेदन के लिए पति और पत्नी दोनों का भारतीय नागरिक होना जरूरी है और उनकी उम्र कानून के मुताबिक होनी चाहिए। आपको दूल्हा-दुल्हन की एक संयुक्त फोटो (Joint Photo) देनी होगी। इसके साथ ही दोनों का जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट और आधार कार्ड लगेगा। 10 रुपये के स्टांप पेपर पर एक शपथ पत्र देना होगा और दोनों पक्षों के शादी के कार्ड भी जमा करने होंगे।

आपकी शादी जिसने करवाई है, चाहे वो पंडित हों, पादरी हों, मौलवी हों या समाज के कोई अन्य व्यक्ति, उनका प्रमाण पत्र भी देना होगा। अगर किसी का यह दूसरा विवाह है, तो पहली शादी के तलाक का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। अंत में, चालान की रसीद जमा करनी होगी। सत्यापन यानी वेरिफिकेशन के समय पति-पत्नी दोनों को कार्यालय में मौजूद रहना होगा।

2006 में ही सुप्रीम कोर्ट ने मैरिज सर्टिफिकेट को कानूनी मान्यता देते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अहम बताया था। जैसे जन्म प्रमाण पत्र आपके अस्तित्व का सबूत है, वैसे ही यह सर्टिफिकेट आपके रिश्ते का कानूनी सबूत है। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, बल्कि कंपनियों में नॉमिनी बनाने, संपत्ति विवाद सुलझाने और बच्चों के भरण-पोषण जैसे मामलों में भी यह एक ढाल की तरह काम करता है।

 

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