छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त पहचान दिलाने के उद्देश्य से 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित होने वाले ‘रायपुर साहित्य उत्सव–2026’ की तैयारियों का जायज़ा लेने कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह एवं आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने आज आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्टॉल, मुख्य मंच, साहित्यिक सत्रों के स्थल, फूड ज़ोन, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा एवं दर्शक सुविधाओं सहित समस्त व्यवस्थाओं को समयबद्ध और सुव्यवस्थित रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य, जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन, नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

‘आदि से अनादि तक’—भारतीय साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव

‘रायपुर साहित्य उत्सव’ के प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन का केंद्रीय विचार ‘आदि से अनादि तक’ है, जो भारतीय साहित्य की निरंतर, जीवंत और विकसित होती परंपरा को रेखांकित करता है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है। उन्होंने निर्देशित किया कि आगंतुकों को सहज, सुरक्षित और यादगार अनुभव मिले, इसके लिए सभी व्यवस्थाएँ उच्च गुणवत्ता की हों।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा  कि रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में बच्चों, युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को साहित्य, विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का प्रमुख उद्देश्य है।

नवा रायपुर बनेगा साहित्य, विचार और कला का केंद्र

तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देशभर के साहित्यकार, विचारक और रचनाकार होंगे शामिल

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक मंच पर संवाद करते नज़र आएँगे। कार्यक्रम के दौरान साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श और रचनात्मक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी।

 छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम

युवाओं और बच्चों को मिलेगा सशक्त मंच

उत्सव की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें नई पीढ़ी को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है। रायपुर जिले के स्कूली बच्चों द्वारा स्वलिखित कविताओं, कहानियों एवं अन्य रचनाओं पर आधारित पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए ओपन माइक जैसे मंच उपलब्ध कराए जाएँगे, जहाँ वे अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर सकेंगे।

युवाओं में आयोजन को लेकर खासा उत्साह है—अब तक 4,000 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।

भव्य पुस्तक मेला और लेखक–पाठक संवाद

उत्सव के दौरान लगभग 40 स्टॉल्स के साथ एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जायेंगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगी। यह मंच लेखकों और पाठकों के बीच सीधे संवाद को प्रोत्साहित करेगा।

‘चाणक्य’ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहेंगी विशेष आकर्षण

रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन किया जाएगा, जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्यकला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को राज्य की जीवंत लोकसंस्कृति से रूबरू कराया जाएगा।

कवि सम्मेलन और संवाद सत्र

विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी।

निरीक्षण के दौरान सभी उपस्थित अधिकारियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने आयोजन को सुव्यवस्थित, प्रभावी और यादगार बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए।

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव–2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा।

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