मनरेगा श्रमिक बने कुशल राजमिस्त्री: सुकमा में नियद नेल्ला नार योजना ने बदली मजदूरों की जिंदगी…

रायपुर: जिन हाथों में कल तक केवल मिट्टी ढोने की कुदाल थी, आज वहीं हाथ नाप-जोख का फीता और करनी थामकर राजमिस्त्री बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सुकमा जिले में वह बदलाव दिखाई दे रहा है, जिसकी कल्पना कुछ वर्ष पहले तक कठिन थी।  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर शुरू हुई नियद नेल्लनार योजना ने मनरेगा श्रमिकों को नया कौशल और नई पहचान दी है, जिसकी सराहना जिले के प्रभारी एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने भी की।

अकुशल से कुशल बनने की नई राह

30 मनरेगा श्रमिकों का चयन कर उन्हें जिला ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में राजमिस्त्री प्रशिक्षण जिला प्रशासन सुकमा ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से प्रदान किया। पहले केवल शारीरिक श्रम करने वाले ये श्रमिक अब ईंट-चिनाई, स्तर माप, प्लिंथ से छत निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा उपायों जैसी तकनीकी जानकारी सीख रहे हैं। जैमेर निवासी श्री चेतन नाग कहते हैं कि यह सिर्फ ईंट और गारे का काम नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान की बात है। अब हमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना होगा और कमाई भी पहले से ज्यादा होगी।

पीएम आवास योजना को मिली स्थानीय मजबूती

जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-26 में 25 हजार 974 आवास स्वीकृत हुए हैं। बड़ी संख्या में निर्माण कार्य होने के कारण कुशल राजमिस्त्रियों की आवश्यकता थी। सुकमा कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की पहल से शुरू हुए इस प्रशिक्षण ने दो बड़े लक्ष्य पूरे किए, जिसके तहत लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला वहीं ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही सम्मानजनक काम मिला। प्रशिक्षित मिस्त्री अब पीएम आवास योजना के मानकों के अनुरूप बेहतर घर बना सकेंगे।

सुकमा में नियद नेल्ला नार योजना ने बदली मजदूरों की जिंदगी

प्रशिक्षित मिस्त्री की आय बढ़ी, भविष्य हुआ सुरक्षित

राजमिस्त्री का कौशल सीखने के बाद श्रमिकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अब उन्हें सामान्य मजदूरी से अधिक पारिश्रमिक प्राप्त होगा, जिससे उनके परिवार का जीवन स्तर सुधरेगा और आर्थिक स्थिरता भी बढ़ेगी।

आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल

यह पहल मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और कौशल विकास का उत्कृष्ट संगम है। सुकमा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में शुरू हुआ यह मॉडल ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब मनरेगा श्रमिक न सिर्फ दूसरों के घर बनाएँगे, बल्कि अपने सपनों की मजबूत नींव भी खड़ी करेंगे।

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