रायपुर में शेरवानी-चश्मा पहनाकर दी गई 2 मासूमों को अंतिम विदाई

रायपुर । रविवार की रात इलाके में खुशियां थी। घर में जन्मदिन मनाने की तैयारियां चल रही थी। हंसी-ठहाकों के बीच बच्चों की खिलखिलाहट थी। लेकिन उससे पहले आलोक (8) और सत्यम (10) पानी भरे गड्ढे में समा गए। यह गड्ढा नवकार बिल्डर के कंस्ट्रक्शन साइट में खोदा गया था।

दोनों बच्चे परिवार समेत बड़ी मौसी के घर बड़े भाई का बर्थडे मनाने आए थे। सत्यम के पिता बिहार लौट चुके हैं। बच्चों की मौसी खुद को उनकी मौत के लिए दोषी मान रही है। वहीं आलोक के पिता की गुढ़ियारी में ही किराने की दुकान है। बार-बार अपने मोबाइल की स्क्रीन पर बच्चे की तस्वीर देखकर रो रहे हैं। मां सदमे में खामोश है।

मुआवजे के कागज पर सब निपट गया है, लेकिन इन घरों की जिंदगी अब भी वहीं अटकी है। उसी गड्ढे के किनारे, जहां दोनों मासूमों की सांसें थम गई थीं। इसी बीच बुधवार को शेरवानी और चश्मा पहनाकर मासूमों को अंतिम विदाई दी गई।

दरअसल, बच्चों ने बर्थ डे पर वही चश्में लेने की जिद की थी। पिता का कहना है कि मैं 1 करोड़ देता हूं, बेटा लौटा सकते हो। वहीं, पुलिस-प्रशासन अब तक बच्चों की मौत का दोषी तय नहीं कर सका है। अभी तक गड्‌ढा भी नहीं पाटा गया है।

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