तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 के तहत प्रदेशभर में चल रहा व्यापक कार्यक्रम

तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति बढ़ाई जा रही जागरूकता’

शिक्षण संस्थानों को “तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान” के रूप में प्रमाणित करने पर दिया जा रहा विशेष बल

छत्तीसगढ़ में ’कोटपा एक्ट की धारा 4 एवं 6 के अंतर्गत 4,288 चालानी कार्यवाहियाँ की गईं, जिनसे लगभग 4 लाख रुपये का वसूला गया जुर्माना’

रायपुर  । भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में युवाओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से अवगत कराने तथा उन्हें नशामुक्त जीवनशैली अपनाने हेतु “तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0” का व्यापक संचालन किया जा रहा है। यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित है, जिसका मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन की रोकथाम, युवाओं में जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।

अभियान के तहत प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, एनएसएस, एनसीसी, युवा संगठनों एवं जनसामान्य को जोड़ते हुए विविध गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों में जागरूकता रैलियाँ, निबंध एवं पोस्टर प्रतियोगिताएँ, नुक्कड़ नाटक, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, कार्यशालाएँ और संवाद सत्र शामिल हैं। इन माध्यमों से युवाओं को तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों-जैसे मुख एवं फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, श्वसन संबंधी समस्याएँ तथा अन्य घातक बीमारियोंकृके बारे में जानकारी दी जा रही है।

अभियान के  दौरान  राज्य एवं जिला स्तर पर संवेदनशील स्थलों जैसे शैक्षणिक संस्थान, बस स्टैंड, सार्वजनिक कार्यालय, अस्पताल परिसर एवं भीड़-भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों में न केवल जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, बल्कि निरीक्षण एवं चलानी कार्यवाही भी की जा रही है। तंबाकू नियंत्रण कानून (कोटपा एक्ट- 2003) के प्रावधानों के पालन को सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रहे हैं।

वर्ष 2025 की प्रथम छमाही में कोटपा एक्ट की धारा 4 एवं 6 के अंतर्गत 4,288 चालानी कार्यवाहियाँ की गईं, जिनसे लगभग 4 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के सहयोग से अभियान की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग का लक्ष्य वर्ष 2025 तक अधिकतम शिक्षण संस्थानों को “तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान” के रूप में प्रमाणित कराना है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रदेश में मुख के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू सेवन है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में तंबाकू उपयोग की दर 39.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 26 प्रतिशत है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में तंबाकू नियंत्रण एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

शव्यापी परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लगभग 29 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। छत्तीसगढ़ में यह अनुपात राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक गंभीर चिंता का विषय है।

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