तुलसीदास व प्रेमचंद जयंती मनाकर दी महान साहित्यकारों को श्रद्धांजलि

तुलसीदास व प्रेमचंद जयंती मनाकर दी महान साहित्यकारों को श्रद्धांजलि

तुलसीदास और प्रेमचंद जयंती पर साहित्य साधकों ने दी श्रद्धांजलि, याद किए अमर रचनाकार

शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा विभाग मनेन्द्रगढ़ में साहित्यिक समागम

मनेन्द्रगढ़ 
साहित्य जगत की दो महान विभूतियों—गोस्वामी तुलसीदास और मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिक्षा विभाग मनेन्द्रगढ़ में एक भव्य साहित्यिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के साथ इन दोनों महापुरुषों को स्मरण किया और उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य  सत्येन्द्र सिंह ने की। इस अवसर पर विशेष रूप से श्रीमती अर्चना वैष्णव, राजीव सोनी, टी. विजय गोपाल राव, रामरक्षा द्विवेदी, जसवंत डहरिया, श्रीमती अंजली सिंह, एवं श्रीमती कंचन त्रिपाठी उपस्थित रहे।
साहित्य से संस्कार तक की प्रेरणा-कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। तत्पश्चात विद्यालय प्राचार्य  सत्येन्द्र सिंह ने गोस्वामी तुलसीदास की साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा—"तुलसीदास न केवल एक कवि थे, बल्कि भारतीय समाज की आध्यात्मिक चेतना के मार्गदर्शक भी थे। रामचरितमानस के माध्यम से उन्होंने धर्म, भक्ति, मर्यादा और नैतिकता को जन-जन तक पहुँचाया।"उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे तुलसीदास जैसे संत कवियों के आदर्शों को आत्मसात करें।
वहीं व्याख्याता श्रीमती अर्चना वैष्णव ने मुंशी प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य पर बोलते हुए कहा कि "प्रेमचंद ने कलम से क्रांति की, उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम जनजीवन की पीड़ा को शब्दों में ढालकर साहित्य को जनमुखी बनाया। ‘गोदान’, ‘निर्मला’ जैसी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।"

साहित्यिक प्रस्तुतियाँ और प्रेरक वक्तव्य

छात्राओं द्वारा तुलसीदास जी की चौपाइयों का वाचन, प्रेमचंद की कहानियों पर लघुनाटिका, और भजन प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह भक्ति और प्रेरणा से भर दिया। शिक्षकों द्वारा दोनों साहित्यकारों की रचनाओं से प्रेरित संस्मरण भी साझा किए गए।

टी. विजय गोपाल राव एवं रामरक्षा द्विवेदी ने कहा कि"भविष्य के नागरिकों को तुलसी और प्रेमचंद जैसे चरित्र निर्माताओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।"

वहीं  राजीव सोनी और श्रीमती अंजली सिंह ने बच्चों से आग्रह किया कि वे साहित्य को केवल विषय न मानें, बल्कि जीवन-दर्शन के रूप में अपनाएं।
सम्मान और समापन
अंत में प्राचार्य श्री सिंह द्वारा सभी प्रतिभागी छात्राओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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