1.18 करोड़ के 8 हार्डकोर सहित 23 इनामी माओवादियों ने किया सरेंडर

सुकमा

 प्रदेश के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में सरकार और प्रशासन की ओर से लगातार माओवाद को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत माओवादियों का आत्मसर्पण करवाया जा रहा है। शनिवार को भी पीएलजीए बटालियन में सक्रिय 8 हार्डकोर समेत 23 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।

जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन पीएलजीए बटालियन के 23 माओवादियों ने शनिवार को सरेंडर कर दिया है। इन सभी को मिलाकर इनके सिर पर 1 करोड़ 18 लाख का इनाम घोषित किया गया था। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में 8 महिला माओवादी भी शामिल है।

बता दें कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी इलाके में होने वाली दर्जनों बड़ी माओवादी गतिविधियों में शामिल थे। सभी माओवादियों ने सरकार की नियद नेल्ला नार और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडरनियद नेल्ला नार और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर नियद नेल्ला नार और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर सरेंडर किया है।

पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा
माओवादियों ने एसपी अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ डीआरजी आनंद सिंह समेत अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया है। अब इन माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

37.50 लाख के इनामी 22 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
नारायणपुर जिले के अत्यंत संवेदनशील माड़ अंचल में चल रहे ‘माड़ बचाव’ अभियान से प्रेरित होकर शुक्रवार को 22 सक्रिय माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की शपथ ली। आत्मसमर्पितों में 14 पुरुष व 8 महिलाएं शामिल हैं। इन पर 37 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पण में शामिल ये माओवादी
माड़ डिवीजन के कुतुल, नेलनार और इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय इन माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुड़िया के समक्ष आत्मसमर्पण किया। मुख्य आत्मसमर्पितों में 8 लाख का इनामी डीविजनल कमेटी सदस्य (डीवीसीएम) मनकू कुंजाम, पांच-पांच लाख के इनामी हिड़मे कुंजाम, पुन्ना लाल ओयाम और सनीराम कोर्राम शामिल हैं।

आत्मसर्पित माओवादियों ने बताया कि माओवादी संगठन की अमानवीय, शोषणकारी विचारधारा, बाहरी नेतृत्व की ओर से भेदभाव और स्थानीय आदिवासियों पर हिंसा के चलते मोहभंग हुआ है। क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्य, स्वास्थ्य, शिक्षा व पुनर्वास योजनाओं ने उन्हें मुख्यधारा की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।

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