रायपुर : सूरज की तपिश से फैल रहा घर आँगन में उजियारा, प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना बनी आमजन के लिए लाभकारी

रायपुर : सूरज की तपिश से फैल रहा घर आँगन में उजियारा, प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना बनी आमजन के लिए लाभकारी

रायपुर : पीएम सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना बनी क्रांति का आधार, अनिल कुमार साहू को मिली राहत, बिजली बिल हुआ शून्य

सौर ऊर्जा से उपभोक्ता ऊर्जा क्षेत्र में हुआ आत्मनिर्भर

अनिल कुमार साहू को मिली राहत, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर : सौर ऊर्जा से जगमगाया बस्तर का बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास

रायपुर

सूरज की तेज गर्मी से सोलर पैनल को ऊर्जा मिलने से लोगों को आसानी से बिजली मिल रही है जिससे घर रोशन हो रहे हैं।प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

 बलौदाबाजार शहर के प्रतिष्ठा कॉलोनी निवासी  प्रसन्न दीवान ने इस योजना के तहत अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कर योजना का लाभ उठाया है। उन्होंने बताया कि योजना की जानकारी उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त हुई जिसके बाद उन्होंने बिजली विभाग से संपर्क कर विस्तृत जानकारी ली। दीवान ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और सरल है। उन्होंने योजना के तहत आवेदन कर 5 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्रणाली अपने घर में स्थापित कराया, जिससे उन्हें ₹78,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। यह प्रणाली पिछले 6 महीनों से सुचारू रूप से कार्य कर रही है और इससे उन्हें प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ हो रहा है। पहले जहां उन्हें हर माह भारी भरकम बिजली बिल चुकाना पड़ता था, अब बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से न केवल बिजली बचत हो रही है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। दीवान ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे भी अपने घरों में इस योजना का लाभ लेकर न केवल बिजली की बचत करें, बल्कि अपनी आय में भी वृद्धि करें। इसके लिए दीवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।

रायपुर : पीएम सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना बनी क्रांति का आधार, अनिल कुमार साहू को मिली राहत, बिजली बिल हुआ शून्य

सौर ऊर्जा से उपभोक्ता ऊर्जा क्षेत्र में हुआ आत्मनिर्भर

अनिल कुमार साहू को मिली राहत, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर : सौर ऊर्जा से जगमगाया बस्तर का बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना आम जनता के लिए आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत साधन बनती जा रही है। यह योजना अब प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। सक्ति जिले के डभरा निवासी अनिल कुमार साहू स योजना का लाभ उठाकर इसे अपने जीवन में बदलाव की एक मिसाल बना दिया है।

साहू अपने घर की छत पर 3 किलोवॉट का सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवाया है, जिसकी मदद से वे प्रतिदिन गर्मियों में 16 से 18 यूनिट और बरसात में 10 से 12 यूनिट तक बिजली का उत्पादन कर रहा है। इस संयंत्र के संचालन के पहले ही महीने उनकी बिजली बिल माइनस में चला गया, और अब पूरी तरह शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त बिजली ग्रिड को सप्लाई कर वे आमदनी भी अर्जित कर रहा है।

इस सोलर सिस्टम पर 78,000 रुपये की सब्सिडी और 10 वर्षों की गारंटी मिली है। साहू के अनुसार, यह संयंत्र 2 से 3 वर्षों में अपनी लागत निकाल लेगा, जिसके बाद लाभ ही लाभ होगा। उन्होंने इस योजना को आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा का साधनष् बताया।

साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना देश और राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।

योजना की प्रक्रिया भी बेहद सरल है दृ उपभोक्ता वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद अधिकृत वेंडर द्वारा संयंत्र की स्थापना की जाती है और सत्यापन के पश्चात सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

यह योजना छत्तीसगढ़ के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित कर रही है, जिससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घट रही है और हर घर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है।

रायपुर : सौर ऊर्जा से जगमगाया बस्तर का बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास

छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिला के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाला छोटा सा आदिवासी गांव धुड़मारास आज विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल यह गांव अब पर्यावरणीय संरक्षण और सतत विकास का मॉडल बनकर उभरा है।

प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली से परिपूर्ण यह गांव, अब सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर अंचल में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ स्थानीय सुविधाओं के विकास के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। धुड़मारास गांव में क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा आधारित विभिन्न परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर स्वच्छ पेयजल, रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के माध्यम से गांव में 03 नग सोलर ड्यूल पम्प की स्थापना कर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। 02 नग सोलर हाईमास्ट संयंत्र की स्थापना कर रात्रिकालीन प्रकाश की व्यवस्था की गई है। ग्राम की गलियों में सोलर पावर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। क्रेडा के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश राणा द्वारा परियोजनाओं की निरंतर निगरानी कर कार्यों को गुणवत्ता पूर्ण ढंग से सम्पन्न कराया गया।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा बस्तर जिले के धुड़मारास गांव और चित्रकोट गांव को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ गांव के रूप में पुरस्कृत किया गया है। प्राकृतिक रूप से समृद्ध धुड़मारास गांव कांगेर नदी की सुरम्य धारा, हरियाली, जैव विविधता एवं पारंपरिक बस्तरिया संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा ट्रैकिंग ट्रेल, कैंपिंग साइट और होम-स्टे की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्थानीय शिल्पकारों व कलाकारों को प्रोत्साहन देकर पारंपरिक हस्तशिल्प को बाजार से जोड़ा जा रहा है। सड़क एवं परिवहन सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।

धुड़मारास गांव में ईको-पर्यटन विकास समिति द्वारा कांगेर नदी में कयाकिंग और बांस राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पर्यटकों हेतु प्रतीक्षालय, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास भी ग्रामीण स्तर पर किया जा रहा है। राज्य शासन के वन एवं पर्यटन विभाग द्वारा धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं। इसी तर्ज पर नागलसर एवं नेतानार जैसे गांवों में भी ईको पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।

धुड़मारास की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि शासन की योजनाएं सामुदायिक सहभागिता के साथ लागू की जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब पूरे बस्तर अंचल के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुका है।

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