रायपुर सूटकेस हत्याकांड…इन 6 बड़ी वजहों से फंसे आरोपी

रायपुर। रायपुर सूटकेस हत्याकांड में पुलिस ने आरोपी अंकित उपाध्याय और उसकी पत्नी शिवानी समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस पूरी घटना में पुलिस को कई अहम सबूत और गवाह मिले हैं, जिनकी मदद से पुलिस 24 घंटे के अंदर ही आरोपियों तक पहुंच गई। दरअसल, किशोर पैकरा (मृतक) को प्रॉपर्टी बेचने के बाद करीब 30 लाख रुपए मिले थे, जिसे अंकित ने अलग-अलग बहाने बनाकर हड़प लिया था। वह पैसे मांग रहा था, जिससे अंकित परेशान था। इसी वजह से उसने हत्या की साजिश रची, फिर किशोर को इंद्रप्रस्थ स्थित एक फ्लैट में ले गया। यहां उसने गला घोंटने के बाद चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। मर्डर के बाद आरोपी खून नहीं रोक पाए। पेटी में लिखा नाम पहला सबूत, फर्जी आधार-कार्ड दिया, लेकिन पेमेंट ऑनलाइन किया।

पहला सबूत- दुकान से खरीदी पेटी

अंकित ने पहले किशोर का गला दबाया। संभावना है कि वह मर चुका था, लेकिन पति-पत्नी कंफर्म नहीं थे, इसलिए अंकित ने चाकू से गले पर वार किया, जिससे किशोर के शरीर से ज्यादा खून निकला। लाश को सूटकेस में ले जाकर कहीं डंप करने की साजिश थी, लेकिन सूटकेस खून से पूरी तरह रंग गया। उसे फ्लैट से नीचे उतारना संभव नहीं था। प्लान फेल होने के बाद वह पेटी लेने गए। यह पेटी कई जगह CCTV कैमरे में कैद हो गई।

दूसरा सबूत- इलेक्ट्रिक स्कूटी से पेटी खरीदने गए

पेटी लेने के दौरान पति-पत्नी ने मुंह में कपड़ा बांधा था। वे सफेद रंग की ग्रीन नंबर प्लेट वाली इलेक्ट्रिक स्कूटी में गए थे। जिसे पुलिस के लिए पहचानना आसान हो गया। पेटी खरीदने के बाद वे ई-रिक्शा में लोड कर इंद्रप्रस्थ की बिल्डिंग में लाए।ई-रिक्शा वाले ने पेटी को ऊपर तीसरी मंजिल पर फ्लैट के दरवाजे तक छोड़ा था, जिससे पुलिस को फ्लैट का पता लग गया।

तीसरा सबूत- 60 हजार में आल्टो कार

आरोपियों ने साजिश के मुताबिक, महीने भर पहले 60 हजार में आल्टो कार इसीलिए खरीदी थी कि इसमें आसानी से सूटकेस में लाश रखकर फेंक सके, लेकिन बाद में पेटी खरीदी। जो कार के भीतर नहीं आ पाई, जिसे पीछे में डिक्की खोलकर रखनी पड़ी। लाश ठिकाने लगाते समय पुलिस को ऐसे कई गवाह मिले। जिन्होंने इस कार में पेटी को देखा था। उन्होंने कार के आने जाने का रूट भी बताया। इसके अलावा पेटी में दुकान के मालिक का नाम भी लिखा था।

चौथा सबूत- ऑनलाइन पेमेंट किया

आरोपी अंकित ने कार खरीदने और फ्लैट को रेंट में लेने के लिए फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। उसमें कोरबा का एड्रेस डलवाया था। लेकिन पेटी खरीदने और फ्लैट का रेंट देने के लिए उसने ऑनलाइन किया। जिससे पुलिस ने बैंक का डिटेल पता लगाकर नाम कंफर्म कर लिया, जो केस में अहम सबूत बने।

पांचवां सबूत- लाश से बदबू आने लगी

अंकित और शिवानी का प्लान तब फेल हुआ, जब लाश से तेज बदबू आनी शुरू हो गई। उन्होंने फ्लैट में परफ्यूम डालकर गंध रोकने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। उन्होंने हड़बड़ा कर लाश में 30 किलो सीमेंट डाला। फिर पेटी भी खरीदी, लेकिन वजन ज्यादा हो गया। जिससे 2 लड़कों को बुलाना पड़ा। इन सबके बावजूद लाश ले जाने के दौरान लिफ्ट में बदबू भर गई। जिससे बिल्डिंग में रहने वाले एक चश्मदीद को शक हो गया। उसने कॉलोनी के गार्ड को बात बताई। यही पुलिस के लिए सूचना का मुख्य आधार बनी।

छठवां सबूत- दिल्ली में रहने फ्लाइट बुक कराई

आरोपियों ने हत्या कर कार को डेंटिंग-पेंटिंग के बहाने एक गैराज में खड़ी कर दिया। घटना के बाद पति-पत्नी ने दिल्ली में किराए के मकान में रहने का प्लान किया था। जिससे वे लंबे समय तक फरार हो पाए। पत्नी ने अपने साथ खर्च के लिए गहने और पर्याप्त कपड़े रख लिए थे। वारदात के बाद ही उन्होंने रायपुर से दिल्ली के लिए फ्लाइट बुक कराई थी। जिससे रायपुर पुलिस को दिल्ली एयरपोर्ट में संपर्क कर आरोपियों को पकड़ने में मदद मिली। इस तरह पुलिस इन कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच गई।

बता दें कि, 23 जून को रायपुर के रायपुरा की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी फेज-2 के पास पेटी में रखकर युवक की सड़ी हुई लाश फेंकी गई। दोपहर बाद से पूरे इलाके में लाश की गंध इतनी फैल रही थी कि शाम होते-होते लोग झाड़ियों में देखने पहुंच गए। वहां ट्रंक देखकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जब ट्रंक खुलवाया तो लाश भीतर एक सूटकेस में ठूंसी हुई मिली। सूटकेस में सीमेंट का प्लास्टर था। फोरेंसिक एक्सपर्ट के अनुसार सीमेंट का मोटा प्लास्टर करने से लाश सड़ने पर दुर्गंध नहीं उठती। हत्यारों ने इसी वजह से कत्ल के बाद युवक की शव को ट्रंक में ठूंसा, फिर उसमें सीमेंट का प्लास्टर किया। इसके बाद चेन लगाकर सूटकेस बंद किया, फिर भी जब दुर्गंध उठने लगी तो पकड़े जाने के डर से सूटकेस को पेटी में रखकर इंद्रप्रस्थ के सुनसान इलाके में फेंक दिया। आरोपियों ने इंद्रप्रस्थ आवास में ही किराए का फ्लैट लिया था। यहीं से वह सुबह 9:50 पर निकलते CCTV कैमरे में कैद हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारी भरकम पेटी के अंदर लाश रखी हुई थी। आरोपी ने प्लानिंग के तहत लाश को कार से लेकर गए। कार इंद्रप्रस्थ कॉलोनी से सुबह 9.50 बजे निकली। इसमें दो लोग सवार दिख रहे हैं। इसके अलावा 2 ईवी सवार भी संदिग्ध है। जिस अल्टो कार में लाश ले जाई गई, उसमें दूसरी कार सेंट्रो का नंबर है। यह नंबर विजय भूषण के नाम पर दर्ज है। रजिस्ट्रेशन 20 साल पुराना है। झाड़ियों में जहां लाश भरी पेटी फेंकी गई है, वहां से करीब 100 मीटर दूर बस्ती है। हत्या कर दिल्ली भागे, जहां से पकड़े गए।

 

 

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