पीएम मोदी ने तिरंगा लहराकर किया चिनाब रेलवे ब्रिज का उद्घाटन, वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली। आज जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण क्षण का साक्षी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज का तिरंगा लहराकर उद्घाटन किया। पीएम मोदी यहां करीब एक घंटा रहे। इस दौरान उन्होंने रेलवे के अफसरों और ब्रिज बनाने वाले कर्मचारियों से मुलाकात की। पीएम मोदी इंजन में बैठकर चिनाब आर्च ब्रिज से केबल स्टे अंजी ब्रिज तक पहुंचे। यहां उन्होंने रेलवे के अंजी ब्रिज का भी उद्घाटन किया।

इसके बाद पीएम कटरा रेलवे स्टेशन पहुंचे और कश्मीर को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाली कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन के जरिये जम्मू से श्रीनगर का रास्ता केवल 3 घंटे का रह जाएगा। पीएम मोदी ने आज जम्मू-कश्मीर में 46 हजार करोड़ की परियोजना का उद्घाटन किया।

इस परियोजना के माध्यम से कश्मीर का रेल मार्ग कन्याकुमारी तक जुड़ गया, जिससे दिल्ली और कश्मीर के बीच की दूरी कम होगी। चिनाब ब्रिज विश्व का सबसे ऊँचा रेल आर्च ब्रिज है, जो भूकंपीय क्षेत्र पांच में स्थित है। यह पुल दो पहाड़ों के बीच निर्मित है, जहाँ तेज हवाओं के कारण विंड टनल फिनोमेना का अनुभव होता है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, पुल को 260 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा की गति का सामना करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।

चिनाब ब्रिज प्रोजेक्ट को पूरा होने में लगे 22 साल

कश्मीर घाटी को देश के अन्य हिस्सों से साल भर रेलवे के माध्यम से जोड़ने के लिए 1997 में USBRL प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी, जिसे पूरा करने में 28 साल से अधिक का समय लगा। चिनाब ब्रिज इसी उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी लागत 43 हजार 780 करोड़ रुपये है। इस 272 किमी लंबी रेललाइन में 36 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 119 किमी है। इसमें 12.77 किमी लंबी T-49 टनल देश की सबसे लंबी ट्रांसपोर्ट टनल मानी जाती है। इसके अलावा, इस ट्रैक पर 943 पुल हैं, जिनकी कुल लंबाई 13 किमी है।

कश्मीर को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना का कार्य 1997 में आरंभ हुआ था। हालांकि, भूवैज्ञानिक और मौसम से संबंधित कठिनाइयों के कारण इस परियोजना की समयसीमा कई बार बढ़ाई गई, जिससे इसकी लागत में भी वृद्धि हुई। अंतत: यह परियोजना 41,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में पूरी हुई।

कुल 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल परियोजना के 209 किलोमीटर हिस्से का कार्य विभिन्न चरणों में सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। अक्टूबर 2009 में 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड का पहला चरण समाप्त हुआ। इसके बाद, जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबा बनिहाल-काजीगुंड खंड, जुलाई 2014 में 25 किलोमीटर लंबा उधमपुर-कटरा खंड, और पिछले वर्ष फरवरी में 48.1 किलोमीटर लंबा बनिहाल-संगलदान खंड पूरा किया गया। इसके अतिरिक्त, 46 किलोमीटर लंबे संगलदान-रियासी खंड का कार्य भी पिछले साल जून में समाप्त हुआ, जबकि रियासी और कटरा के बीच 17 किलोमीटर का शेष हिस्सा अंतत: पिछले साल दिसंबर में पूरा हुआ।

 

 

 

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