प्रयागराज महाकुम्भ में आकर्षण का केंद्र होगा ‘एकात्म धाम‘

भोपाल : सनातन संस्कृति की दिव्य अनुभूति के महापर्व "महाकुम्भ प्रयागराज : 2025" में तीर्थराज प्रयाग के पावन संगम तट पर आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश द्वारा अद्वैत वेदान्त दर्शन के लोकव्यापीकरण एवं सार्वभौमिक एकात्मता की संकल्पना के उद्देश्य से एक माह 12 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक "एकात्म धाम शिविर" सेक्टर-18, हरिश्चन्द्र मार्ग, महाकुम्भ क्षेत्र, झूंसी, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश में किया जा रहा है।

एकात्म धाम शिविर में प्रतिदिन अद्वैत वेदान्त पर केन्द्रित संवाद, श्रवण, मनन, निधिध्यासन द्वारा ध्यान, शास्त्रार्थ सभा, संत समागम, शंकर संगीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, वैदिक अनुष्ठान एवं भाष्य पारायण, 'एकात्म धाम' प्रकल्प पर केन्द्रित प्रदर्शनी, अद्वैतामृतम्, विमर्श सभा, पुस्तक प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होगी।

पहली बार प्रयागराज महाकुम्भ में आएंगे श्रृंगेरी शंकराचार्य, शास्त्रार्थ सभा एवं संत समागम की करेंगे अध्यक्षता

दशनामी संन्यास परम्परा के लाखों साधु-संत, संन्यासी, आचार्य महामंडलेश्वर, महंत सहित आर्ष परंपरा के मनीषी महाकुम्भ में सम्मिलित होते हैं। यह सुखद संयोग है कि इस बार महाकुम्भ में पहली बार श्रृंगेरी शंकराचार्य विधुशेखर भारती सन्निधानम् आएंगे, वे एकात्म धाम द्वारा 25 एवं 26 जनवरी को शास्त्रार्थ सभा एवं 27 जनवरी को संत-समागम की अध्यक्षता करेंगे। शास्त्रार्थ सभा में देश-दुनिया के प्रमुख विद्वान आएंगे जो आत्मा, जगत जैसे मनुष्य के जिज्ञास्य विषयों पर चिंतन की अनेक धाराओं के अनुसार विवेचना करेंगे। शास्त्रार्थ चिंतन के मूल्यांकन की विशेष विधि है जिसमें विषय को प्रस्तुत किया जाता है और विद्वत परिषद वाद, जल्प और वितण्डा के रूप में समालोचनात्मक पद्धति से विचार करती है। शास्त्रार्थ सभा में प्रो. राजाराम शुक्ल (वाराणसी), प्रो. मणि द्रविड़ शास्त्री (चेन्नई), प्रो. श्रीहरि शिवराम धायगुड़े (तिरुपति) सहित अनेक विद्वान शामिल होंगे। संत समागम में श्रृंगेरी शंकराचार्य के साथ द्वारिका शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज सहित हजारों साधु संत शामिल होंगे।

अद्वैत एवं शांति विषय पर आयोजित विमर्श सभा में शामिल होंगे पद्मविभूषण रविशंकर, अद्वैत एवं पर्यावरण सत्र में एरिक सोहेम (नार्वे) होंगे शामिल

विमर्श सभा में देश- दुनिया के विद्वान 5 प्रमुख विषयों पर अद्वैत दर्शन की प्रासंगिकता पर विमर्श करेंगे। 28 जनवरी को अद्वैत एवं पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व कार्यकारी निदेशक (पर्यावरण) एवं एकात्म धाम के एम्बेंसडर एरिक सोहेम, परमार्थ निकेतन के प्रमुख स्वामी चिदानंद मुनि, पद्मभूषण अनिल जोशी, 31 जनवरी को अद्वैत एवं विकास विषय पर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, एरिक सोहेम, 2 फरवरी को अद्वैत एवं शांति विषय पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पद्मविभूषण रविशंकर, 4 फरवरी को अद्वैत एवं संस्कृति एवं 5 फरवरी को अद्वैत एवं विज्ञान विषय पर आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. कामकोटि, रामकृष्ण मिशन के स्वामी आत्मप्रियानंद, प्रो. मृत्युंजय गुहा सहित अनेक विषय विशेषज्ञ सम्मिलित होंगे।

‘दृग्दृश्यविवेक’ पर 12 से 17 जनवरी तक आनंदमूर्ति गुरू माँ के होंगे प्रवचन

शिविर में 12 से 17 जनवरी तक आनंदमूर्ति गुरू माँ आचार्य शंकर विरचित दृग्दृश्यविवेक, 25 से 27 जनवरी तक स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ‘कठोपनिषद’, 6 फरवरी को स्वामिनी विमलानंद सरस्वती एवं 7 फरवरी को स्वामी मित्रानंद सरस्वती आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर संवाद करेंगे। 6-7 फरवरी को ही शाम 6 बजे से अभिनेता नीतिश भारद्वाज एवं कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ‘शंकर गाथा’ की प्रस्तुति देंगी। दिनांक 8 से 12 फरवरी तक राम जन्म भूमि न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि प्रतिदिन शंकरो लोकशंकर: आचार्य शंकर के जीवन प्रसंग पर कथा करेंगे।

सांस्कृतिक एवं वैचारिक महाकुम्भ के साथ ‘एक ओंकार’ में गूंजेगे एकात्मता के स्वर…

सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में ‘एक ओंकार’ के अंतर्गत अलंकार सिंह ‘गुरूवाणी’ में अद्वैत गायन, पद्ममधुप मुद्गल ‘कबीर वाणी’ में अद्वैत गायन, जयतीर्थ ‘संत तुकाराम’ की वाणी में अद्वैत (अभँग) तथा रजनी गायत्री ‘शंकर स्त्रोतम्’ की प्रस्तुति देंगी। वैदिक अनुष्ठान के साथ ही प्रतिदिन 20 बटुक एवं आचार्य वेद एवं भाष्य पारायण करेंगे।

महाकुम्भ पूर्व से पश्चिम एवं उत्तर से दक्षिण तक आचार्य शंकर द्वारा स्थापित सांस्कृतिक एकता का साक्षी बने इसी भाव के साथ संन्यास परम्परा के विराट उत्सव के रूप में युग-युगीन सनातन ज्ञान-परम्परा के इस प्रकट-प्रभावी उत्सव में एकात्म धाम शिविर आयोजित है।

आचार्य शंकर ने भारतवर्ष का भ्रमण कर सम्पूर्ण राष्ट्र को सार्वभौमिक एकात्मता से आलोकित किया। अद्वैत वेदान्त दर्शन के शिरोमणि, सनातन वैदिक धर्म के पुनरुद्धारक एवं सांस्कृतिक एकता के देवदूत शंकर भगवत्पाद का जीवन-दर्शन अनंत वर्षों तक संपूर्ण विश्व का पाथेय बने, इस संकल्प के साथ आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग आचार्य शंकर की संन्यास एवं ज्ञान भूमि 'ओंकारेश्वर' में भव्य एवं दिव्य 'एकात्म धाम' के निर्माण के लिए संकल्पित है।

एकात्म धाम प्रकल्प में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊँची बहुधातु 'एकात्मता की मूर्ति' (Statue of Oneness), आचार्य शंकर के जीवन तथा दर्शन पर आधारित संग्रहालय 'अद्वैत लोक' एवं अद्वैत वेदान्त दर्शन के अध्ययन, शोध एवं विस्तार हेतु 'आचार्य शंकर अन्तर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदान्त संस्थान' की स्थापना करते हुए एकात्मता के वैश्विक केन्द्र (A Global Centre of Oneness) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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