नई शिक्षा नीति से स्कूल शिक्षा में हो रहे बदलाव की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुँचे

भोपाल : स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन से स्कूल शिक्षा में लगातार बदलाव आ रहा है। इन बदलाव की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुँचाने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों के माध्यम से जानकारी को बच्चों और उनके अभिभावकों तक पहुँचाने पर जोर दिया। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह मंगलवार को मंत्रालय में टॉस्क फोर्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अशासकीय सदस्य के रूप में रविन्द्र कन्हरे, अशोक कडेल, अखिलेश श्रीवास्तव, मेघा मुक्तिबोध और सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल और आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता मौजूद थीं।

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने स्कूलों में पढ़ाई के साथ व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा पर जिन ट्रेडों पर शिक्षा दी जा रही है, उनका लगातार अपडेट किया जाना भी जरूरी है। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि अगले शैक्षणिक-सत्र में शासकीय स्तर पर अधिक संख्या में पूर्व प्राथमिक शाला खोलने की आवश्यकता है। प्रदेश में अभी कक्षा-1 से नीचे की 4473 प्री-एजुकेशन क्लॉस में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इन शालाओं में करीब एक लाख बच्चे दर्ज हैं। इन्हें पीएम पोषण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने शासकीय स्कूलों को उत्सव केन्द्र के रूप में विकसित करने की बात भी कही।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन

सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल ने बताया कि प्रदेश में बच्चों को शिक्षा के दिलचस्प कंटेंट मिलें, इसके लिये शैक्षणिक क्षेत्र की निजी संस्थाओं से एमओयू किया जायेगा। आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिये 13 समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के सुझाव के आधार पर शिक्षा के गुणात्मक सुधार के लिये बेहतर से बेहतर प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिये विशेष अभियान चलाते हुए कक्षा-9 से कक्षा-12 तक के 17 हजार अतिशेष शिक्षकों का युक्ति-युक्तकरण और 20 हजार शिक्षकों की उच्च पद प्रभार से पदपूर्ति की गयी है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में एनईपी लागू होने के बाद अब तक 50 हजार शिक्षकों की भर्ती की जा चुकी है। एनसीईआरटी के डिजिटल टीचर्स ट्रेनिंग प्लेटफार्म पर 3 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रदेश में कक्षा-1 से 8 तक के 2050 सरकारी स्कूलों की 4100 कक्षाओं को स्मार्ट क्लॉस के रूप में बदला जा रहा है। प्रदेश में करीब 2 लाख शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिये टेबलेट की राशि उपलब्ध करायी गयी है।

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