गुरु घासीदास जयंती पर हुआ जिला स्तरीय अस्पृश्यता निवारणार्थ सद्भावना शिविर

गरियाबंद

सतनाम पंथ के प्रवर्तक बाबा गुरु घासीदास की जयन्ती के अवसर पर आज 18 दिसम्बर को वन विभाग के ऑक्सन हॉल में जिला स्तरीय अस्पृश्यता निवारणार्थ सद्भावना शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने बाबा गुरु घासीदास तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन कर समाज एवं देश की प्रगति की कामना की। इस दौरान स्कूली छात्र-छात्राओं के द्वारा गीत एवं नृत्य के माध्यम से सतनाम पन्थ की शिक्षा से सभी को अवगत कराया, इसके साथ ही बच्चों के द्वारा दी गई विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मनमोहा। इस दौरान अस्पृश्यता उन्मूलन के सम्बंध में आयोजित भाषण, निबंध लेखन, रंगोली, पोस्टर जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद गरियाबंद के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सोनटेके ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज बहुत शुभ दिवस है, इस अवसर पर हम सभी सद्भावना दिवस मना रहे हैं। अस्पृश्यता उन्मूलन शिविर का आयोजन जिला प्रशासन द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि इस दिवस के मायने बहुत से हैं। उन्होंने कहा कि बाबा ने जो मार्ग लोगों को बताया है, उसे हमारे देश के संविधान निर्माता डॉ.भीमराव अंबेडकर ने पहचाना और उसे आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बाबा का उद्देश्य समाज को जागृत करना, समाज मे समरसता, समानता की भावना लाना था, उन्होंने मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया जिसका अर्थ है, सभी मनुष्य एक है। उन्होंने समाज मे फैली कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रति प्रयास किया।

अपर कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त श्री नवीन भगत ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी अपृश्यता निवारण सद्भावना शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सतनाम पंथ के प्रर्वतक गुरू घासीदास जी ने मनखे-मनखे एक समान का नारा सभी समाज के लिए दिया था, जिसमें सभी मानव समाज बराबर है। कोई ऊंच नीच का भेदभाव न हो राज्य शासन द्वारा बौलादाबाजार जिला के गिरौदपुरी धाम में विश्व का सबसे बड़ा जैतखाम बनाया गया है। जहां गुरू घासीदास जी का जन्म हुआ था।

वहां प्रतिवर्ष 18 दिसम्बर को गुरू घासीदास जी की भव्य जयंती मनाई जाती है। जहां प्रदेश के साथ-साथ देश-विदेश के लोग भी दर्शन करने के लिए आते है। इस अवसर पर उन्होंने बाबा गुरु घासीदास की शिक्षा का उल्लेख करते हुए उनका अनुसरण करने की बात कही तथा बाबा की जीवनी के बारे में लोगों को बताया। इस दौरान श्री सुरेन्द्र बंजारे, श्री के.के. निर्मलकर, श्री हेमलाल रात्रे सहित अन्य अतिथियों ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक नृत्य, चित्रकला, रंगोली ईत्यादि प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान विभाग के मंडल संयोजक, छात्रावास अधीक्षक एवं छात्रावासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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