श्रीमद्भगवद गीता एक अनूठा आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ – मंत्री टेटवाल

भोपाल : कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री गौतम टेटवाल ने अमरकंटक में आयोजित गीता महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक पुर्नरुद्धार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मकर संक्रांति, विजयादशमी, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाने की परंपरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता का परिणाम है। गीता जयंती का आयोजन इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनर्स्थापित करने का एक अनुकरणीय प्रयास है।

मंत्री टेटवाल ने कहा कि श्रीमद् भगवद गीता मानव जीवन के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य वचनों के माध्यम से जीवन की हर समस्या का समाधान छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता की महिमा को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। गीता के उपदेश न केवल आध्यात्मिक मार्ग को प्रशस्त करते हैं, बल्कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने का साहस भी प्रदान करते हैं।

मंत्री टेटवाल ने कहा कि आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे श्रीमद्भगवद गीता का नियमित पठन करें। उन्होंने कहा कि गीता का पाठ मानसिक विकारों को दूर करता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन और गीता के उपदेश केवल धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि धर्मग्रंथ गीता सदैव हमारी संस्कृति और परंपराओं का प्रमुख आधार रहा है। मंत्री जायसवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नवजागरण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गीता के 700 श्लोक जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं और इसे समझना हर व्यक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में धारकुंडी आश्रम के स्वामी लवलीन महाराज ने कहा कि गीता जयंती सद्कर्म, स्वधर्म और कर्तव्य पथ पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि 5 हजार वर्ष पूर्व दिये गये गीता के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। गीता का अध्ययन मनुष्य को धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुति

गीता महोत्सव का शुभारंभ साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों द्वारा मां नर्मदा के छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और कन्या-पूजन से हुआ। महंत और संत महात्माओं को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। मृत्युंजय आश्रम के बटुकों ने श्रीमद्भगवद गीता का सस्वर वाचन किया। सरस्वती शिशु मंदिर, कल्याणीका केंद्रीय शिक्षा निकेतन, पीएम शासकीय विद्यालय, और जवाहर नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य और योग प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

इस भव्य आयोजन में संत-समाज, नागरिक, जनप्रतिनिधि और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गीता महोत्सव का आयोजन भारतीय संस्कृति के गौरव को पुनर्स्थापित करने और गीता के उपदेशों को समाज में प्रचारित-प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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