छत्तीसगढ़ में छठ महापर्व पांच नवंबर से, नहाय-खाय से शुरुआत कर देंगे डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य

रायपुर.

सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा पांच नवंबर से मनाया जायेगा। चार दिवसीय छठ पूजा की शुरुआत पांच नवंबर को नहाय खाय के साथ होगी। महादेव घाट रायपुर में छठ महापर्व बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। इसे लेकर छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट ने रुपरेखा तैयार कर ली है।

सात नवंबर की शााम को महादेवघाट में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी, जिसमें अंतराष्ट्रीय लोकगायिका कल्पना पटवारी मुंबई, अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका गायत्री यादव लखनऊ, लोक गायिका परिणीता राव पटनायक और छत्तीसगढ़ के प्रख्यात भजन गायक दिलीप षड़ंगी सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे। इस अवसर पर नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की जायेगी। इस पूजा के दौरान पहली बार महादेवघाट में खारुन गंगा मैया की महाआरती की जाएगी। इससे अलावा नवा रायपुर अटल नगर स्थित तालाब में छठ महापर्व भव्य रुप में मनाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि छठ महापर्व छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा, बस्तर समेत अन्य शहरों में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। रायपुर में छठ पूजा 50 से अधिक स्थानों पर जैसे महादेव घाट, व्यास तालाब बिरगांव और अन्य तालाबों किनारे मनाया जाता है।  पांच से आठ नवंबर तक पूरे देश में छठ पूजा  की जायेगी। समिति जिला प्रशासन और नगर निगम की सहयोग से हारून नदी महादेव घाट के सभी घाटों की साफ सफाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि छठ पूजा प्राचीन काल से ही स्वच्छता का संदेश देती आ रही है। इस पर्व में व्रती महिलायें शुद्ध प्रसाद बनाती हैं, जिसे सूर्य भगवान को भोग लगाया जाता है। लोग सड़क और घाटों की सफाई करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, छठी मैया विश्व की सबसे बड़ी स्वच्छता की ब्रांड एंबेसडर हैं। इस वर्ष पांच नवंबर से नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत होगी। 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य और 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ महापर्व का समापन होगा। छठ पर्व को शक्ति पूजा और सूर्य सष्टी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।  यह पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड पूर्वांचल, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है। त्योहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस व्रत में महिलायें पवित्र स्नान, उपवास और निर्जल, लंबे समय तक पानी में खड़े रहना, प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश और राज्यों में बसे हैं। वहां अपनी संस्कृतियों को आज भी संजोये हुए हैं। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा का आरंभ हो जाता है। यह महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। छठ पूजा का मुख्य व्रत कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और भविष्य के लिए सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना करती है। इस दौरान महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। यही वजह है कि इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। पहले दिन नहाय-खाय के साथ छठ पूजा की शुरुआत होती है। दूसरे दिन लोहंडा और खरना होता है। वहीं तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण किया जाता है और इसी के साथ इस पर्व का समापन हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल छठ पूजा कब से शुरू हो रही है।

जानें कब है छठ पूजा?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि के साथ छठ पूजा का आरंभ हो जात है। वहीं षष्ठी तिथि को शाम के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 7 नवंबर को 12 बजकर 41 मिनट (ए एम) से आरंभ हो रही है, जो 8 नवंबर को 12 बजकर 34 मिनट (ए एम) पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 7 नवंबर को ही सूर्य को संध्या अर्घ्य दी जाएगी।

पत्रवार्ता में ये रहे मौजूद
इस मौके पर सुखबीर सिंह, राघव रविंद्र सिंह, सुनील सिंह, रामविलास सिंह, अनिल सिंह, कन्हैया सिंह, शशि सिंह, परमानंद सिंह, संतोष सिंह, सत्येंद्र सिंह गौतम, राकेश सिंह, विश्वेश्वर सिंह, राजेश सिंह, संजय सिंह, रविंद्र शर्मा, बृजेश सिंह, वेदनारायण सिंह, मनोज सिंह आदि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रहे।

इन देशों में भी होती है छठ पूजा
छठ महापर्व नेपाल, सूरीनाम, दोहा, कतर, फिजी, मॉरीशस,गुयाना और अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

छठ पूजा 2024 कैलेंडर
0- छठ पूजा का पहला दिन, 5 नवंबर 2024- नहाय खाय (मंगलवार)
0- छठ पूजा का दूसरा दिन, 6 नवंबर 2024- खरना (बुधवार)
0- छठ पूजा का तीसरा दिन, 7 नवंबर 2024- संध्या अर्घ्य (गुरुवार)
0- छठ पूजा का चौथा दिन, 8 नवंबर 2024- उषा अर्घ्य (शुक्रवार)

नहाय-खाय का महत्व
नहाय-खाय से छठ पूजा की शुरुआत होती है। नहाय खाय जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इस दिन स्नान करके भोजन करने का विधान है। नहाय खाय के दिन व्रत करने वाली महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करती हैं। यहि नदी में नहाना संभव न हो ते घर पर भी नहा सकते हैं। इसके बाद व्रती महिलाएं भात, चना दाल और लौकी का प्रसाद बनाकर ग्रहण करती हैं।

खरना 2024
छठ पूजा के दूसरे दिन को लोहंडा या खरना कहा जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना का प्रसाद बनाया जाता है। इस दिन माताएं दिनभर व्रत रखती हैं और पूजा के बाद खरना का प्रसाद खाकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का आरंभ करती है। इस दिन मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी से आग जलाकर प्रसाद बनया जाता है।

तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन शाम के समय नदी या तालाब में खड़े होकर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही बांस के सूप में फल, गन्ना, चावल के लड्डू, ठेकुआ सहित अन्य सामग्री रखकर पानी में खड़े होकर पूजा की जाती है।

चौथा दिन उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे और आखिरी दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन व्रती अपने व्रत का पारण करते हैं। साथ ही अपनी संतान की लंबी उम्र और अच्छे भविष्य की कामना करते हैं। प्रसाद बांटकर पूजा का समापन होता है। 

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