कछारडीह जल जीवन मिशन से आत्मनिर्भरता की ओर एक सफल पहल

महासमुंद

जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर स्थित ग्राम कछारडीह लंबे समय से पेयजल समस्याओं से जूझ रहा था। गांव के पास पानी के कुछ साधन जैसे 4 हैंडपंप और 2 पावर पंप थे, लेकिन गर्मियों में वे सूख जाते थे, जिससे पानी की भारी कमी हो जाती थी। कई परिवारों के घरों में पीने के पानी की कोई निजी व्यवस्था नहीं थी, और उन्हें तालाबों और कुओं से निस्तारी के लिए पानी लाना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पीने के पानी की सुविधा का अभाव था, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा था।

ग्राम कछारडीह में परिवर्तन की शुरूआत तब हुई जब जल जीवन मिशन के तहत ग्राम सभा का आयोजन कर ग्रामीणों को इस योजना के उद्देश्यों और लाभों से अवगत कराया गया। क्रियान्वयन के लिए संगम सेवा समिति को जिम्मेदारी दी गई। इस योजना अंतर्गत ग्राम जल स्वच्छता समिति का गठन किया गया, जिसमें 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। समिति के अध्यक्ष के रूप में ग्राम सरपंच और सचिव के रूप में पंचायत सचिव की नियुक्ति की गई।

जल जीवन मिशन के तहत गांव में गांव में 66.09 लाख रुपये की लागत से 40 किलोलीटर की जल टंकी का निर्माण किया गया। 635 मीटर पाइपलाइन बिछाई गई, जिससे हर घर में नल से पानी पहुंचना संभव हुआ। जल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल परीक्षण समिति बनाई गई। इस समिति में मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं को प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे फील्ड टेस्ट कीट और भ्२ै विधि से पानी की शुद्धता की नियमित जांच कर सकें।

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