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बड़ी खुशखबरी! नेहरू मेडिकल कॉलेज में होगी 210 डॉक्टरों की भर्ती, जानिए किस विभाग में कितने पद खाली? – Kohram News

बड़ी खुशखबरी! नेहरू मेडिकल कॉलेज में होगी 210 डॉक्टरों की भर्ती, जानिए किस विभाग में कितने पद खाली?

छत्तीसगढ़: जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के 210 रिक्त पदों के लिए पहली बार वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 20 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से होगा। पद इतने रिक्त हैं कि यदि पर्याप्त डॉक्टर आ भी जाएं तो भी समय कम पड़ जाएगा। चूंकि प्रबंधन को पता है कि संविदा भर्ती के लिए कम ही डॉक्टर आएंगे। ऐसे में इसका आयोजन सिर्फ एक दिन के लिए किया जा रहा है। अधिकांश मौकों पर 100 के अंदर रिक्त पदों के लिए वॉक-इन आयोजित किया जाता रहा है।

नेहरू मेडिकल कॉलेज में हर महीने वॉक-इन आयोजित किया जाता है, ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके। पहली बार कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के लिए 12 असिस्टेंट प्रोफेसर, पेरिटोनिस्ट और फिजिशियन असिस्टेंट के 3-3 पदों पर भर्ती की जाएगी। सीटीवीएस के असिस्टेंट प्रोफेसर में क्रिटिकल केयर के 3, मेडिसिन के 2, पीडियाट्रिक्स के 3, एनेस्थीसिया के 2 और कार्डियक एनेस्थीसिया के 2 पदों पर भर्ती की जाएगी।

वहीं, 3 सीनियर रेजीडेंट की भी भर्ती की जाएगी। अन्य विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 56 और सीनियर रेजीडेंट के 106 पद भरे जाएंगे। सभी भर्तियां संविदा पर की जाएंगी। कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर को 95 हजार, एसोसिएट को 1.55 लाख और प्रोफेसर को 1.90 लाख प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। यह निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों की तुलना में कम है। यही कारण बताकर ज्यादातर डॉक्टर ज्वाइनिंग से बच रहे हैं।

शपथ पत्र और एनपीए पर भी विवाद चरम पर

नेहरू समेत प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में शपथ पत्र और एनपीए पर विवाद चरम पर है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों से शपथ पत्र मांगा है कि उनके अस्पतालों में कोई भी सरकारी डॉक्टर सेवाएं नहीं दे रहा है। यह आदेश विभाग के लिए गले की फांस बन गया है। दरअसल, इस विवाद के बाद डीकेएस, अंबेडकर अस्पताल, राजनांदगांव, दुर्ग और रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। गुरुवार को अंबेडकर में जनरल सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसएन गोले ने नौकरी छोड़ दी है। उन्होंने नवा रायपुर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन कर लिया है। डीकेएस से दो यूरो सर्जन, एक न्यूरो सर्जन और एक न्यूरोलॉजिस्ट ने इस्तीफा दे दिया है। दूसरा विवाद एनपीए को लेकर है। सरकार ने एनपीए लेने वाले डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। इस विवाद में भी नए डॉक्टर ज्वाइन नहीं करना चाहते हैं।

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